मेरे पिताजी राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के एक सच्चे स्वंयसेवक थे। 1946 में रांची में उन्होंन संघ की शाखा आरम्भ की थी। उन्होंने बहुत ही कम उम्र से रांची की सामाजिक संस्थाओं में रूचि लेनी आरम्भ की और महाप्रयाण तक अपना सम्पूर्ण जीवन सामाजिक कार्यों में लगाया।
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श्री बाजपेयी जी हमारे स्नेही पारिवारिक अभिभावक थे। पिताजी का अटलजी के साथ 1960 के दशक से सम्बन्ध था। 1963 में रांची एक्सप्रेस का प्रकाशन भी पिताजी ने उन्हीं के सुझाव पर आरम्भ किया था। आरम्भ के दिनों में उनके रांची आगमन पर उनका प्रवास हमारे निवास स्थान पर ही होता था। अटलजी का मातृभाषा हिन्दी में धारा प्रवाह सम्बोधन अभूतपूर्व था।
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एक मध्यम वर्गीय परिवार में परवरिश हुई जिसमें आरंभ से ही हिन्दू धर्म के प्रति गहरी आस्था एवं संस्कार मिला। आरंभिक दिनों में परिवार की जिम्मेवारियां निभाने के साथ आगे बढ़ने में संघर्ष किया। सरल स्वाभाव एवं समाज के लिए कार्य करने में हमेशा आगे रहने की इच्छा रही।
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अजय मारू की व्यापारिक गतिविधियां काफी सराहनीय रही है। वैसे तो पारिवारिक व्यापार से जुड़ाव 14 वर्ष की आयु से ही आरम्भ हो गया था। परिवार की व्यापारिक गतिविधियों में समाचार पत्र प्रकाशन अग्रणी है।
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70 के दशक से अल्प आयु में अपने घरेलू व्यवसाय में लग गया। पिता जी के साथ प्रिंटिंग प्रेस एवं सप्ताहिक रांची एक्सप्रेस में योगदान देना शुरू किया। पांच दशक के व्यवसायिक समय में कई उतार चढ़ाव देखे।
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पिता श्रद्देय सीताराम मारू को बचपन से अपने व्यापार के साथ साथ सामाजिक गतिविधियों में कार्य करते नजदीक से देखा। पिताश्री का अनुकरण करते हुए पंद्रह वर्ष की आयु से श्री श्याम मित्र मण्डल के माध्यम से वर्ष 1975 से रथयात्रा मेला हो या फिर रामनवमी एवं अन्य सामाजिक संगठनों में सेवा कार्य आरंभ किया।
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कोरोना काल में रांची कल्ब, माहेश्वरी सभा, संस्कृति विहार, रांची न्यूरोलाजिकल ट्रस्ट द्वारा सेवा कार्य आरंभ किया तथा नागरमल मोदी सेवा सदन (चेरिटेबल अस्तपताल) में अधिक से अधिक मरीजों के इलाज में प्रमुख भूमिका निभाई।
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सामाजिक कार्य करते करते राजनीति में प्रवेश कर 2002 में झारखंड राज्य के निर्माण के बाद हुए राज्यसभा के पहले राज्यसभा चुनाव मार्च 2002 में 43 वर्ष की आयु में भारतीय जनता पार्टी ने उच्च सदन में भेजा।
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10 वर्ष की आयु से डाक टिकट संग्रह का शौक जागृत हुआ। डाक टिकटों की कई प्रर्दशनी में भी भाग लिया। भारत की अजादी के बाद डाक विभाग द्वारा जारी अभी तक के 3000 से अधिक मिंट टिकटों का संग्रहकर्ता। साथ-साथ भारत की आजादी के पहले की करंसी (नोट)तथा विदेशों की करंसी (नोट) के संग्रहकर्ता।
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अध्यक्ष
(पंच परगना में शिक्षा, चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य एवं बुंडू में सूर्य उपासना भवन का संचालन)

सांसद, राज्यसभा (2002-2008)
अध्यक्ष
निदेशक ( 2001 से मार्च 2002 तक )
संस्थापक सदस्य एवं कार्यकारिणी समिति
सदस्य (1987 के प्रारंभ से 2001 तक )
अध्यक्ष (2009-12 एवं 2012-15)
अध्यक्ष, मेडिकल बोर्ड (2018-21 एवं 2021-24)
(झारखण्ड का प्रमुख चैरिटबल अस्पताल )

संरक्षक

संस्थापक सदस्य

संरक्षक